हिमालय की गोद से

हिमालय  की  गोद  से
बहुत खुबसूरत है आशियाना मेरा ,है यही स्वर्ग मेरा,मेरु मुलुक मेरु देश

Wednesday, July 27, 2022

हेलंग

 हेलंग


कटण वळौंन

क्य क्या नि काटि दुन्या मा  

कैन डालि बोटि काटि

कैन सदनि मुण काटि

वेकी जु जरा सी उठी माथ 

क्वी क्वी त पैली बटि उस्ताज रैं

सदनि कटणा मा हैंका जैड 

कैकु जिन्दग्या् सफर कटै ग्याई 

सदनि हैंका कटै मा

त कैन कन्न कन्ना दिन कटिन

कटिन कन्न कन्न उकाळ 

ईं आश मा कि 

कब्बि त खुलली या रात

कब्बि त व्होली सुबेर 

कैन सर्या जिंदगी काटि मौज मा

ईं सुन्दर धर्ती तैं छलणी बणैकि

धैरिक डाम हैंका जिकुड़ी मा

यूँ डाँड़ियूँ- काँठीयूँ  तैं खरमंड्या बणैकि

कै ग्यीं नीलाम लगैकि मवासी घाम 

हे राम दा ! 

नि काट सकदि बल

अपडा ही पाड़ 

अपडा ही डाँडा बटि

अपडा ही हेलंग मा 

एक पुल घास

त बस वा बिचरि 

जैन सदनि काटि पाड़

दुःख अर खैरि को

अर जैंक काँधियूँ मा टिक्यूँ

अज्यूँ तलक बि मुण्ड उठैकि 

खड़ो हुयूँ शान से

हमारो यो पाड़


© गीतेश नेगी

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